बलात्कार लड़कियों ! वक़्त और तारीख़ मुकर्रर कर दो । आख़िर कब तक , कब तक खुद को यूँ कमज़ोर महसूस करोगी? कब तक इन दरिंदों को हँसने का मौका दोगी? आख़िर कब तक एक दरिंदा तुम्हें यूँ ही नोचता रहेगा ? कब तक मैं अख़बार में निर्भया को देखता रहूँगा ? चींखते हुए, चिल्लाते हुए , मदद की गुहार लगाते हुए , लाचारों के जैसे । आख़िर किस बात की मदद चाहिए तुम्हें ख़ुद की रक्षा के लिए , मुझे तो नहीं लगता कि कोई इतना कमज़ोर है कि वो अपना बचाओ न कर सके। हाथ हैं , नाख़ून है , दांत है अगर वो तुम्हें काट सकते हैं तो तुम भी उन्हें काट सकती हो । अगर वो तुम्हें मार सकते हैं तो हाथ तुम्हारे पास भी है । अगर हम नारी शक्ति की बात करते हैं तो क्यूँ करते हैं । नारियों के अंदर अगर लक्ष्मी, सरस्वती हैं तो काली, दुर्गा भी हैं और किससे गुहार लगा रही हो तुम सब । इस समाज से ये नामर्दो का समाज है यहाँ अब नपुंसक रहते हैं । ये लोग सोशल नेटवर्क पे बस तुम्हारी मौत पे मोमबत्ती जलाने के लिए आयेंगे , सेल्फी लेंगे , और घर जा के सो जायेंगे । उल्टा ऐसे लोग तुम्हें और ज्ञान देंगे, क्या ज़रूरत थी ऐसे कपड़े पहनने की, क्या ज़रूरत थी रात में घूमने क...