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उच्च शिक्षा के नियामक

1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग. UGC ( UNIVERCITY grant commission) 2. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद 3. दूरस्थ शिक्षा परिषद 4. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर 5. बार काउंसिल ऑफ इंडिया 6. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद एनसीटीई 7. भारतीय पुनर्वास परिषद 8. भारतीय चिकित्सा परिषद एमसीआई 9. भारतीय फार्मेसी परिषद 10 भारतीय नर्सिंग परिषद आईएनसी 11 भारतीय दांत परिषद डीसीआई 12. केंद्रीय होम्योपैथी परिषद 13. भारतीय औषधि केंद्रीय परिषद

दुनिया की सबसे बड़ी मूर्तियां

April fool

एक मुर्गी 🐔और उसके तीन🐤🐤🐤बच्चे एक सड़क पार कर रहे थे। सड़क पार करने के बाद मुर्गी के एक बच्चे ने कहा हम सातो ने सड़क पार कर ली 🐤🐤🐤🐤🐤🐤🐤 ,,,,,, सात कैसे?।सोचो,,,,। मैसेज दोबारा पढो,,,...

Pin drop

Can you hear a pin drop? What is the meaning of pin drop silence? Following are some instances when silence could speak louder than voice.  Take 1: Field Marshal Sam Bahadur Maneckshaw once started addressing a public meeting at Ahmedabad in English.  The crowd started chanting, "Speak in Gujarati.    We will hear you only if you speak in Gujarati."  Field Marshal Sam Bahadur Maneckshaw stopped.  Swept the audience with a hard stare and replied,  "Friends, I have fought many a battle in my long career.   I have learned Punjabi from men of the Sikh Regiment;  Marathi from the Maratha Regiment;  Tamil from the men of the Madras Sappers;  Bengali from the men of the Bengal Sappers,  Hindi from the Bihar Regiment; and  Even Nepali from the Gurkha Regiment.    Unfortunately there was no soldier from Gujarat from whom I could have learned Gujarati."......

लोकतंत्र खतरे में है

लोकतंत्र खतरे में है! हमारे देश में दो चीजे बार बार खतरे में आ जाती है। एक तो है “धर्मविशेष” जो पिछले कई दशकों से खतरे में न आये इसीलिए देश की पिछली सरकारों ने बड़े जतन से रखा हुआ था लेकिन 2014 के बाद से नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में यह “धर्मविशेष” बार बार खतरे में आ ही जाता है। दूसरा है यहाँ का लोकतंत्र जो 2014 के पहले तक कभी खतरे में तो नहीं था लेकिन 2014 में जैसे ही नरेन्द्र मोदी ने शपथ ग्रहण की है लोकतंत्र के खतरे में आने की शुरुआत हो गयी। आजकल एक धर्म और लोकतंत्र यह दोनों ही चीजे ऐसी है जो हर चौथे दिन खतरे में आ जाती है। पहले एक धर्म ही खतरे में आता था अब तो लोकतंत्र भी खतरे में आने लगा:--- मोदी प्रधानमंत्री बने धर्म खतरे में आ गया, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन गए धर्म खतरे में आ गया, ट्रिपल तलाक बिल आ गया धर्म खतरे में है, हलाला और नारी शक्ति पर बात करो तो धर्म खतरे में है, आतंकी को फांसी की सजा सुना दो धर्म खतरे में है, वन्दे मातरम के नारे लगा दो, राष्ट्रगान गा दो धर्म खतरे में है, मंदिर-मस्जिद से लाउड स्पीकर हटाने की बात कर दो तो धर्म खतरे में है। ए...

पैसा तेरे कितने नाम

*वाह रे पैसा! तेरे कितने नाम?* मंदिर मे दिया जाये तो *( चढ़ावा )*  स्कुल में *( फ़ीस )* शादी में दो तो *( दहेज )* तलाक देने पर *( गुजारा भत्ता )*  आप किसी को देते हो तो *( कर्ज )*  अदालत में *( जुर्माना )* सरकार लेती है तो *( कर )*  सेवानिवृत्त होने पे *( पेंशन )* अपहर्ताओ के लिएं *( फिरौती )* होटल में सेवा के लिए *( टिप )* बैंक से उधार लो तो *( ऋण )* श्रमिकों के लिए *( वेतन )*  मातहत कर्मियों के लिए *( मजदूरी )* अवैध रूप से प्राप्त सेवा *( रिश्वत )* और मुझे दोगे तो *(गिफ्ट)*  *मैं पैसा हूँ:!*  मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते; मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ। *मैं पैसा हूँ:!*  मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें। *मैं पैसा हूँ:!*  मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते। *मैं पैसा हूँ:!*  मैं नमक की तरह हूँ; जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है। ...

बलात्कार

बलात्कार लड़कियों ! वक़्त और तारीख़ मुकर्रर कर दो । आख़िर कब तक , कब तक खुद को यूँ कमज़ोर महसूस करोगी? कब तक इन दरिंदों को हँसने का मौका दोगी? आख़िर कब तक एक दरिंदा तुम्हें यूँ ही नोचता रहेगा ? कब तक मैं अख़बार में निर्भया को देखता रहूँगा ? चींखते हुए, चिल्लाते हुए , मदद की गुहार लगाते हुए , लाचारों के जैसे । आख़िर किस बात की मदद चाहिए तुम्हें ख़ुद की रक्षा के लिए , मुझे तो नहीं लगता कि कोई इतना कमज़ोर है कि वो अपना बचाओ न कर सके। हाथ हैं , नाख़ून है , दांत है अगर वो तुम्हें काट सकते हैं तो तुम भी उन्हें काट सकती हो । अगर वो तुम्हें मार सकते हैं तो हाथ तुम्हारे पास भी है । अगर हम नारी शक्ति की बात करते हैं तो क्यूँ करते हैं । नारियों के अंदर अगर लक्ष्मी, सरस्वती हैं तो काली, दुर्गा भी हैं और किससे गुहार लगा रही हो तुम सब । इस समाज से ये नामर्दो का समाज है यहाँ अब नपुंसक रहते हैं । ये लोग सोशल नेटवर्क पे बस तुम्हारी मौत पे मोमबत्ती जलाने के लिए आयेंगे , सेल्फी लेंगे , और घर जा के सो जायेंगे । उल्टा ऐसे लोग तुम्हें और ज्ञान देंगे, क्या ज़रूरत थी ऐसे कपड़े पहनने की, क्या ज़रूरत थी रात में घूमने क...