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ओशो के प्रेरक कथन

"किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है. आप स्वयं में जैसे हैं एकदम सही हैं. खुद को स्वीकारिये."–ओशो "There is no need of any competition with anybody. You are yourself, and as you are, you are perfectly good. Accept yourself." - Osho "जब मैं कहता हूँ कि आपलोग  देवी-दे...

रवींद्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार

"प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।"- रबीन्द्रनाथ  ठाकुर   "सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है। यह इसका प्रयोग करने वाल...

शिव खेड़ा के अनमोल विचार

जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को  अलग तरह से करते हैं.  -शिव खेड़ा जीतने  वाले लाभ देखते हैं, हारने वाले नुकसान  . -शिव खेड़ा "यदि आपको लगता है कि आप कर सकते हैं - त...

राष्ट्रगीत वंदे मातरम

भारत के “राष्ट्रगीत” के रुप में वन्दे मातरम् के दो छंदों को स्वीकार किया गया है। “वन्दे मातरम् सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शश्य श्यालालां मातरं वन्दे मातरम् सुब्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम् पुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् सुहासिनीं सुमधुर भाषिनीम् सुखदां वरदां मातरं वन्दे मातरम्” वन्दे मातरम् पूरा गीत “वन्दे मातरम् सुजलां सुफलां, मलयजशीतलाम्, शश्यश्यालालां, मातरं! सुब्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्, पुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् सुहासिनीं, सुमधुर भाषिनीम्, सुखदां वरदां मातरं! सप्त-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद कराले कोट-भुजैधृत-खरकरवावाले, अबला केन माएत बले। बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं रिपुदलवारिणीं मातरम्।। तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वम् हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधरिणी कमला कमलदलविहारिणी वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् नमामि कमलाम् अमलां अतुलाम् सुजलां सुफलाम् मातरम्।। वन्दे मातरम्। श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भुषिताम् धरणीं भरणीं मातरम्।। व...

राष्ट्रगान

भारत के राष्ट्रगान के रूप में जन गण मन के सिर्फ दो छंद ही लिए गए हैं जनगणमन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता! पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जयगाथा। जनगणमंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता! जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।। जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता पंजाब-सिन्ध-गुजरात-मराठा द्राविड़-उत्कल-बंग विन्ध्य-हिमाचल, यमुना-गंगा उच्छल जलधि तरंग तव शुभ नामे जागे तव शुभ आशिष मांगे गाहे तव जय गाथा जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत-भाग्य-विधाता जय हे, जय हे, जय हे जय-जय-जय, जय हे जन गण मन का पूरा गीत निम्नलिखित है जनगणमन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता! पंजाब सिन्धु गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जयगाथा। जनगणमंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता! जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।। अहरह तव आह्वान प्रचारित, शुनि तव उदार बाणी हिन्दु बौद्ध शिख जैन पारसिक मुसलमान खृष्टानी पूरब पश्चिम आसे तव सिंहासन-पाश...

हनुमान जी की आरती

आरती हनुमान लला की श्री हनुमान जी की आरती आरती कीजॆ हनुमान लला की। दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर काँपे। रोग-दोष जाके निकट न झाँपॆ॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन...

भगवान शिव की आरती

आरती जय शिव ॐकारा श्री शिवजी की आरती जय शिव ओंकारा, भज हर शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धाङ्गी धारा॥ जय शिव….. एकानन, चतुरानन, पञ्चानन राजॆ। हंसासन, गरुड़ासन, वृष...